तकनीक और संवेदना के समन्वय से बनेगा समावेशी विकास: मुख्यमंत्री

तकनीक और संवेदना के समन्वय से बनेगा समावेशी विकास: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित “AI in Transforming Healthcare” कॉन्फ्रेंस में यूपी AI मिशन की घोषणा की। 2000 करोड़ रुपये के निवेश से स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ेगा। जानिए कैसे AI से यूपी बनेगा हेल्थकेयर में नंबर 1 राज्य।

मुख्यमंत्री
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  • AI से बदलेगा यूपी का हेल्थ सिस्टम! सीएम योगी ने लॉन्च किया UP AI Mission, जिससे बीमारी की पहचान, इलाज और निगरानी होगी पहले से ज्यादा तेज और सटीक। 
  • ₹2000 करोड़ से बनेगा स्मार्ट हेल्थकेयर मॉडल! सीएम योगी ने लखनऊ में UP AI Mission की घोषणा की, AI से बदलेगी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं।
  • AI से बदलेगा शासन का तरीका! सीएम योगी बोले – रिएक्टिव नहीं प्रोएक्टिव बनेगी सरकार, UP AI Mission से हेल्थ सेक्टर में बड़ा बदलाव।

लखनऊ, 12 जनवरी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शासन को रिएक्टिव से प्रोएक्टिव बनाने का सशक्त माध्यम बन रही है। जब तकनीक संवेदना से जुड़ती है, नीति नवाचार से संचालित होती है और शासन विश्वास पर आधारित होता है, तभी विकास समावेशी बनता है और भविष्य सुरक्षित होता है।

मुख्यमंत्री लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस ‘एआई इन ट्रांसफॉर्मिंग हेल्थकेयर’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि यूपी एआई मिशन के तहत अगले तीन वर्षों में लगभग 2000 करोड़ रुपये के कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे, जिससे उत्तर प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के प्रयोग में देश का अग्रणी राज्य बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एआई के माध्यम से महामारियों और वेक्टर जनित रोगों से जुड़े डेटा का बेहतर विश्लेषण कर अधिक सटीक नीतियां बनाई जा सकती हैं। प्रदेश में मेडिकल डिवाइस पार्क, फार्मा पार्क, लखनऊ में मेडिटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, गौतम बुद्ध नगर में एआई आधारित उद्यमिता केंद्र, आईआईटी कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और लखनऊ को एआई सिटी के रूप में विकसित करने का कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने शासन में तकनीक के उपयोग के उदाहरण देते हुए बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में ई-पॉस मशीनों की स्थापना, फर्जी राशन कार्डों की पहचान, डीबीटी के माध्यम से पेंशन का सीधा लाभ और डिजिटल ट्रांजेक्शन से पारदर्शिता बढ़ी है।

स्वास्थ्य ढांचे में सुधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले जहां प्रदेश में 40 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 81 हो गई है और दो एम्स भी संचालित हैं। आईसीयू, ऑक्सीजन प्लांट, डायलिसिस, ब्लड बैंक और डिजिटल डायग्नोस्टिक सुविधाएं अब सभी जिलों में उपलब्ध हैं। टेलीमेडिसिन और वर्चुअल आईसीयू सेवाओं से दूरदराज के क्षेत्रों को भी लाभ मिल रहा है।

इंसेफेलाइटिस उन्मूलन, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी और टीबी नियंत्रण में एआई आधारित टूल्स के उपयोग को उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताया। साथ ही यह भी कहा कि एआई का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए, मानव को एआई पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा, राज्य मंत्री अजीत पाल, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल और अपर मुख्य सचिव चिकित्सा अमित कुमार घोष सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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