Azamgarh News: कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद पैमाइश का आदेश, किसान ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार

Azamgarh News: कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद पैमाइश का आदेश, किसान ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार: आजमगढ़ जमीन विवाद: कोर्ट में केस लंबित होने के बावजूद पैमाइश आदेश जारी, किसान ने प्रशासन पर आरोप लगाकर डीएम से न्याय की गुहार लगाई।

कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद पैमाइश का आदेश
कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद पैमाइश का आदेश

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कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद कार्रवाई से किसान आक्रोशित, प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप

रिपोर्ट: ब्यूरो डेस्क | आज़मगढ़

आजमगढ़ जिले की सगड़ी तहसील से एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम टड़वा बदनपुर निवासी किसान चंद्रकेश पुत्र स्वर्गीय रूपचंद ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि उसकी जमीन से जुड़े विवाद का मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बावजूद उपजिलाधिकारी द्वारा पैमाइश कराने का आदेश जारी कर दिया गया, जो न केवल नियमों के विरुद्ध है बल्कि इससे उसकी खड़ी फसल को भी भारी नुकसान हो सकता है।किसान का कहना है कि यह आदेश विपक्षी पक्षकारों से मिलीभगत कर दिया गया है और इसका उद्देश्य उसे आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान करना है।

क्या है पूरा मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम टड़वा बदनपुर स्थित गाटा संख्या 90, 92, 93 एवं बगल के गाटा संख्या 94 को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस संबंध में वाद संख्या 4225/2025 (चंद्रकेश बनाम रामदरश) सिविल जज (हैवल) न्यायालय, आजमगढ़ में दर्ज है और फिलहाल विचाराधीन है। इसी दौरान राजस्व विभाग में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 24 के अंतर्गत पैमाइश हेतु एक ऑनलाइन आवेदन भी दाखिल किया गया, जिसका कंप्यूटरीकृत आवेदन संख्या T202515060716744 है। इस आवेदन में गाटा संख्या 94 की पैमाइश का अनुरोध किया गया है, जिसके खातेदार के रूप में “कृष्णा” का नाम दर्ज है। आवेदन में पड़ोसी गाटों के रूप में अमरजीत, अब्दुल अब्बास, दुर्घई, नाली और अंजना सोनी आदि के नाम भी अंकित हैं। किसान चंद्रकेश का आरोप है कि जबकि मामला अदालत में लंबित है, ऐसे में पैमाइश कराना न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप जैसा है और इससे स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है।

किसान के आरोप: “फसल बर्बाद कराने की साजिश”

अपने प्रार्थना पत्र में किसान ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि वर्तमान समय में खेतों में फसल खड़ी है। यदि जबरन पैमाइश कराई गई तो खेतों में चल रहे कृषि कार्य प्रभावित होंगे और उसकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। किसान का दावा है कि पहले ही स्थानीय लेखपाल और कानूनगो द्वारा यह रिपोर्ट दी जा चुकी है कि फसल कटने से पहले पैमाइश करना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि इससे फसल को नुकसान होगा और सीमांकन सही ढंग से नहीं हो पाएगा। इसके बावजूद 17 जनवरी 2026 को राजस्व समिति गठित कर 18 जनवरी 2026 को पैमाइश कराने का आदेश जारी कर दिया गया।

चंद्रकेश का कहना है—

“मैं एक साधारण किसान हूं। मेरी आजीविका खेती पर निर्भर है। अगर मेरी फसल बर्बाद हो गई तो परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो जाएगा। विपक्षी दबंग हैं और अधिकारियों से मिलीभगत कर मुझे नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।”

प्रशासनिक आदेश पर उठे सवाल

किसान द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि जब मामला न्यायालय में लंबित है, तब राजस्व विभाग द्वारा इतनी जल्दबाजी में पैमाइश का आदेश क्यों जारी किया गया।

कानूनी जानकारों का कहना है कि जब किसी भूमि से संबंधित विवाद अदालत में विचाराधीन हो, तो आमतौर पर किसी भी प्रकार की राजस्व कार्रवाई से पहले न्यायालय के आदेश या स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जाता है, ताकि भविष्य में कोई कानूनी जटिलता उत्पन्न न हो।

हालांकि, इस मामले में उपजिलाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी आदेश ने विवाद को और अधिक गंभीर बना दिया है।

पीड़ित किसान की मांगें

किसान चंद्रकेश ने जिलाधिकारी से निम्न मांगें की हैं—

  1. पैमाइश कराने के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
  2. जिन अधिकारियों ने न्यायालयीन वाद लंबित होने के बावजूद यह आदेश जारी किया, उनके खिलाफ जांच व कार्रवाई की जाए।
  3. विपक्षी पक्षकारों की भूमिका की भी जांच कराई जाए, जिन्होंने कथित तौर पर गलत लाभ लेने का प्रयास किया।
  4. फसल कटने के बाद ही किसी भी प्रकार की पैमाइश या सीमांकन की कार्रवाई की जाए।

धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन की चेतावनी

किसान ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई और पैमाइश आदेश वापस नहीं लिया गया, तो वह अपने परिवार के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन करने को मजबूर होगा।

उसने यह भी लिखा है कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की समस्या की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

राजस्व रिकॉर्ड में क्या दर्ज है

उपलब्ध राजस्व दस्तावेजों के अनुसार:

  • पैमाइश का आवेदन उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 (संशोधित 2016) के तहत दिया गया।
  • आवेदन शुल्क 1000 रुपये जमा किया गया है।
  • वाद 13 नवंबर 2025 को दर्ज हुआ।
  • गाटा संख्या 94 का क्षेत्रफल लगभग 0.2210 हेक्टेयर दर्शाया गया है।

इन तथ्यों के आधार पर किसान का कहना है कि यह पूरा मामला सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि उसकी आजीविका से सीधा जुड़ा हुआ है।

प्रशासन की चुप्पी

इस मामले में जब स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। हालांकि सूत्रों का कहना है कि जिला प्रशासन को शिकायत मिल चुकी है और जल्द ही इस पर आंतरिक जांच हो सकती है।आजमगढ़ का यह मामला केवल एक किसान और उसके खेत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया, न्यायालयीन अधिकार और आम नागरिक की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन किसान की शिकायत पर क्या कदम उठाता है—क्या पैमाइश आदेश रद्द होगा, या फिर मामला और अधिक तूल पकड़ते हुए आंदोलन और धरना-प्रदर्शन तक पहुंचेगा।

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