किसानों को दर्द शहरों को सुकून

किसान

अचानक हुई उत्तर प्रदेश में बारिश से किसानों की गेहूं की फसलें खराब हो गईं। सैकड़ों बीघा फसल पानी से भीगकर बर्बाद हो गई, जबकि इस समय गेहूं की कटाई जोरों पर थी। मौसम में अचानक बदलाव ने किसानों को बड़ी मुश्किल में डाल दिया।

अभी 30/40% फसल की कटाई हुई थी कही भुखमरी न हो जाए

एक किसान परिवार

में इस समय आय का मुख्य स्रोत गेहूं होता जिससे उनके परिवार की बेसिक आवश्यकताएं पूरी होती है…..अब सरकार कोई मदद करेगी ??

 

आज जो बारिश एवं ओलावृष्टि हुई है यह पता नहीं कितने किसानों की आत्महत्या का कारण भी बन सकती है ।

 

क्योंकि बहुत से किसानों की फ़सल ऐन मौके पर ज़ब कटाई करके घर लाने का समय था उसी समय खराब हो गयी है।

 

भारत सरकार को सच मे उन बेचारे अन्नदाताओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

 

इतना भी आसान नहीं होता “एक किसान होना।”

शहरों में तो लोग अपने अपने घरों मे बैठकर सुहाने मौसम का आनंद ले रहे होंगे, घर में बने पकवानों के साथ सुहाने मौसम का जिक्र हो रहा होगा लेकिन वहीं दूसरी तरफ किसान बेचारे खेत की मेढ़ पर बैठ कर रो रहा है । सोच रहा है  की खाद की बकाया राशि कैसे दे पाऊंगा घर में बच्चों को नए कपड़े कैसे लाऊं बच्चों का एडमिशन कैसे कराऊं एक ही रस्ता था खेती अच्छी हो जाएगी तो अपने बच्चों का अच्छे स्कूल में एडमिश  करा लूंगा लेकिन एकाएक बदले मौसम ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया है । देखते हैं सरकारें क्या करती हैं किसानों के लिए।

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