ग्राम निधि घोटाले का आरोप : बिना काम कराए लाखों से अधिक के भुगतान की शिकायत, डीएम से जांच की मांग आजमगढ़ ग्राम पंचायत में वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया
जांच के नाम पर खानापूर्ति ? सख्त कार्रवाई की उठी मांग
आजमगढ़ जिले के निजामाबाद तहसील अंतर्गत विकास खंड तहबरपुर की ग्राम पंचायत जमालपुर काजी में ग्राम निधि के दुरुपयोग का गंभीर आरोप सामने आया है। ग्राम पंचायत के एक निवासी ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए वर्तमान ग्राम प्रधान पर बिना कार्य कराए फर्जी फर्मों के नाम पर लगभग 21 लाख रुपये से अधिक के भुगतान का आरोप लगाया है।
शिकायत के अनुसार, ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है। जिन कार्यों को अभिलेखों में पूर्ण दर्शाया गया है, वे या तो आंशिक रूप से कराए गए हैं या धरातल पर उनका कोई अस्तित्व ही नहीं है।
कागजों में विकास, ज़मीनी हकीकत शून्य: ग्रामीणों का आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि सड़क, नाली, इंटरलॉकिंग और अन्य विकास कार्यों के नाम पर फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में आज भी कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में लाखों रुपये खर्च दिखाए गए हैं । ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भुगतान जिन फर्मों के नाम पर किया गया है, वे संदिग्ध हैं और उनका इस्तेमाल केवल कागजी खानापूर्ति के लिए किया गया। इससे सरकारी धन के गबन की आशंका और भी गहरी हो जाती है।
जांच टीम गठित करने और सख्त कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिला स्तरीय जांच टीम गठित की जाए। साथ ही, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो ग्राम प्रधान के विरुद्ध पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 95(1) के तहत कार्रवाई की जाए । इसके अलावा, शिकायत में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतनी बड़ी राशि का भुगतान संभव नहीं है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार, ग्रामीणों में आक्रोश
फिलहाल इस मामले में ग्राम प्रधान की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शिकायत पत्र प्राप्त होने के बाद संबंधित विभाग से रिपोर्ट तलब की जा सकती है और प्राथमिक जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी । वहीं, गांव में इस मामले को लेकर आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ गांव तक नहीं पहुंच रहा, जबकि कागजों में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
गौरतलब है कि आजमगढ़ जिले में इससे पहले भी ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं और ग्राम निधि के दुरुपयोग के कई मामले सामने आ चुके हैं। कई मामलों में जांच के बाद कार्रवाई भी हुई है, लेकिन लगातार ऐसे आरोप सामने आना पंचायत व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
जांच के नाम पर खानापूर्ति ? सख्त कार्रवाई की उठी मांग
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए तत्काल जिला स्तरीय जांच टीम गठित की जाए। आरोप है कि ग्राम निधि से जुड़े इस गंभीर प्रकरण में बिना कार्य कराए फर्जी भुगतान किया गया है और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित ग्राम प्रधान के विरुद्ध पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 95(1) के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मामले को दबाने के उद्देश्य से अधिकारियों द्वारा केवल औपचारिक बैठक 06/01/2026 को जिले पे की गई जो मात्र खानापूर्ति साबित हुई । बैठक में शिकायतकर्ताओं की बातों को न तो गंभीरता से सुना गया और न ही किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचा गया। आरोप है कि बिना शिकायतकर्ताओं को संतुष्ट किए, बिना मौके पर स्थलीय सत्यापन किए और बिना पारदर्शी जांच के ही पूरी प्रक्रिया को कागजों में निपटा दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की औपचारिकताएं ही होती रहीं, तो ग्राम निधि में हो रहे भ्रष्टाचार पर कभी अंकुश नहीं लग पाएगा। शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह मामला केवल धन के गबन का नहीं, बल्कि पूरी पंचायत व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में वास्तविक जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों में आक्रोश है और वे निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।