BREAKING NEWS : राष्ट्रीय समाजसेवी अरुण कुमार व कुलदीप कौर ने उठाई ₹5000 समान पेंशन की बुलंद मांग

BREAKING NEWS : ₹1000 पेंशन में जीवनयापन को मजबूर दिव्यांग, निजामाबाद निरीक्षण में सामने आई पीड़ा

 

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निजामाबाद (आजमगढ़)।
नगर पंचायत निजामाबाद में दिनांक 5 जनवरी 2025 को राष्ट्रीय प्रमुख समाजसेवी अरुण कुमार एवं समाजसेविका कुलदीप कौर द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान एक अत्यंत पीड़ादायक और चिंताजनक मामला सामने आया। वार्ड संख्या-2, मोहल्ला तिग्गीपुर निवासी शिक्षित दिव्यांग युवक शाहआलम पुत्र स्वर्गीय अजीजुल रहमान की सामाजिक-आर्थिक स्थिति ने शासन की दिव्यांग कल्याण योजनाओं की हकीकत उजागर कर दी।

शाहआलम आजीविका के लिए मजबूरी में किराए की दुकान पर ढाबा चला रहे हैं, लेकिन आर्थिक तंगी इतनी गहरी है कि ढाबे पर ग्राहक तक नहीं आते। वर्तमान में उन्हें भारत सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा केवल ₹1000 प्रतिमाह दिव्यांग पेंशन मिलती है, जो महंगाई के इस दौर में जीवनयापन के लिए नाकाफी है।

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14 वर्षों से जारी है संघर्ष

राष्ट्रीय समाजसेवी अरुण कुमार ने बताया कि वे पिछले 14 वर्षों से देशभर के दिव्यांग, विधवा, वृद्ध और बेसहारा नागरिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान धरना-प्रदर्शन, आमरण अनशन, मांग-पत्र और ज्ञापन के माध्यम से लगातार केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा रहा है । हर वर्ष 15 अगस्त से पूर्व और 26 जनवरी से पूर्व आजमगढ़ स्थित अंबेडकर पार्क (कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने) आमरण अनशन किया जाता है। इसी क्रम में आगामी 20 जनवरी 2026 को भी आमरण अनशन प्रस्तावित है, जिसमें 48 क्रमवार मांगों के साथ-साथ दिव्यांग पेंशन को ₹5000 प्रतिमाह किए जाने की मांग प्रमुख रूप से शामिल होगी।

पेंशन में भारी असमानता पर सवाल

BREAKING NEWS : समाजसेवियों ने सवाल उठाया कि देश के विभिन्न राज्यों में दिव्यांग, विधवा और वृद्धा पेंशन की राशि ₹2500, ₹3000 या उससे अधिक है, जबकि उत्तर प्रदेश में आज भी मात्र ₹1000 प्रतिमाह दी जा रही है। यह असमानता सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

ई-रिक्शा योजना में भी भेदभाव का आरोप

अरुण कुमार और कुलदीप कौर ने दिव्यांगों के लिए चलाई जा रही ई-रिक्शा योजना पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 85% दिव्यांगता की शर्त लगाकर अधिकांश गरीब, असहाय और मजबूर दिव्यांगों को योजना से बाहर कर दिया गया है, जबकि 40%–45% दिव्यांगता वाले लोग भी काम करने में पूर्ण रूप से अक्षम होते हैं।

बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित

कई दिव्यांग नागरिकों को आवास योजना, राशन कार्ड, विवाह जैसी सामाजिक सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। आर्थिक तंगी के कारण उनका सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है।

सरकार से भावनात्मक अपील

समाजसेवियों ने केंद्र व राज्य सरकार से मांग की कि—

  • संपूर्ण भारतवर्ष में
    दिव्यांग, विधवा, वृद्ध और बेसहारा नागरिकों को समान रूप से ₹5000 प्रतिमाह पेंशन लागू की जाए

  • सभी दिव्यांगों को बिना भेदभाव ई-रिक्शा/ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाए

  • योजनाओं में प्रतिशत की बाध्यता को सरल किया जाए

उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस मांग को जनहित में स्वीकार करती है, तो लाखों जरूरतमंद नागरिक सम्मानपूर्वक जीवन जी सकेंगे । समाजसेवियों ने आशा जताई कि सरकार उनकी पीड़ा भरी मांग को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निर्णय लेगी

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