अमिताभ ठाकुर के आरोपों से सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल:कोडीन कफ सिरप मामला
“नाम लिया तो रात में उठा लिया गया, एनकाउंटर का डर था” — पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर का सनसनीखेज दावा
लखनऊ/उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में उस समय खलबली मच गई, जब पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने कोडीन युक्त कफ सिरप मामले में अपनी गिरफ्तारी को लेकर बेहद गंभीर आरोप लगाए। जेल में अनशन समाप्त करने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने इस मामले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह और भाजपा के कुछ बड़े नेताओं का नाम लिया, तभी उन्हें रात में उठाकर गिरफ्तार किया गया । अमिताभ ठाकुर ने कहा कि गिरफ्तारी के दौरान उन्हें इस बात का डर सता रहा था कि कहीं उनका फर्जी एनकाउंटर न कर दिया जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े उनके पास ठोस और महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं।
अनशन खत्म, लेकिन आरोप और लड़ाई जारी
BREAKING NEWS : पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने बताया कि उन्होंने जेल में चल रहा अनशन इसलिए समाप्त किया क्योंकि कोर्ट ने मामले में सार्थक पहल की, जिससे उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा हुआ। उन्होंने कहा कि वे इस पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें बीच रास्ते से ही गिरफ्तार कर लिया गया । उनका कहना है कि यह गिरफ्तारी सामान्य कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि दबाव बनाने और आवाज़ दबाने की कोशिश प्रतीत होती है।
मामले का एनालिसिस: आरोप क्या संकेत देते हैं ?
इस पूरे घटनाक्रम से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं
-
क्या कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार के पीछे राजनीतिक संरक्षण है ?
-
अगर पूर्व आईपीएस अधिकारी के पास ठोस सबूत हैं, तो अब तक उनकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं हुई ?
-
क्या गिरफ्तारी का समय और तरीका सवालों के घेरे में है ?
अमिताभ ठाकुर का दावा है कि उन्होंने जिन नामों का उल्लेख किया, वे प्रभावशाली हैं और इसी कारण कार्रवाई उनके खिलाफ तेज़ी से की गई।
अब निगाहें न्यायपालिका पर
BREAKING NEWS : यह मामला अब पूरी तरह से न्यायिक जांच और उच्च न्यायालय की भूमिका पर निर्भर करता है। यदि अमिताभ ठाकुर द्वारा पेश किए जाने वाले सबूत अदालत में टिकते हैं, तो यह मामला केवल एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि राजनीतिक–प्रशासनिक गठजोड़ पर बड़ा सवाल बन सकता है। वहीं दूसरी ओर, यह भी आवश्यक है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके और कानून पर लोगों का भरोसा बना रहे। अमिताभ ठाकुर के बयान केवल व्यक्तिगत आरोप नहीं हैं, बल्कि वे उत्तर प्रदेश में ड्रग माफिया, राजनीतिक संरक्षण और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस छेड़ते हैं। अब यह देखना अहम होगा कि अदालत और जांच एजेंसियां इन दावों को किस दिशा में ले जाती हैं। Readmore……
BREAKING NEWS : विश्वविद्यालय की मेस में खाने में मिला जिंदा कीड़ा, छात्रों में उबाल