आजमगढ़ जर्जर पुल और उखड़े खड़ंजे ने रोकी राह: आजमगढ़ के बरदह क्षेत्र के उदियावां गांव में गांगी नदी पर बना 1961 का पुराना पुल और संपर्क मार्ग जर्जर हो चुका है। उखड़े खड़ंजे के कारण ग्रामीणों को 2 किमी की दूरी तय करने के लिए 7 किमी का चक्कर लगाना पड़ रहा है। जानिए पूरी खबर।
2 किमी के लिए 7 किमी का चक्कर लगाने को मजबूर ग्रामीण
बरदह (आजमगढ़)।
उदियावां गांव से होकर गुजरने वाली गांगी नदी पर बना पुराना पुल और उससे जुड़ा संपर्क मार्ग बदहाली की हद पार कर चुका है। पुल तक पहुंचने वाला खड़ंजा पूरी तरह उखड़ गया है और रास्ता जगह-जगह टूट चुका है। नतीजा यह है कि ग्रामीणों को मात्र दो किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए सात किलोमीटर का लंबा और जोखिम भरा रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
1961 में बना था पुल, अब बन चुका है खतरे की घंटी
स्थानीय लोगों के अनुसार इस पुल का निर्माण वर्ष 1961 में तत्कालीन ग्राम प्रधान स्वर्गीय अश्वत्थामा तिवारी द्वारा कराया गया था। यह मार्ग गोड़हरा बाजार और तहसील मुख्यालय लालगंज को जोड़ने का सबसे छोटा रास्ता था और वर्षों तक ग्रामीणों की जीवनरेखा बना रहा।
लेकिन लंबे समय से मरम्मत और रखरखाव न होने के कारण पुल की संरचना कमजोर हो चुकी है और उसके दोनों ओर का खड़ंजा उखड़कर बिखर गया है। कई स्थानों पर ईंटें धंस चुकी हैं, जिससे आए दिन लोग फिसलकर गिर रहे हैं।
पैदल चलना मुश्किल, वाहन चलाना जोखिम भरा
वर्तमान हालात में इस मार्ग से पैदल गुजरना भी मुश्किल हो गया है। साइकिल, बाइक और ठेले से आना-जाना जान जोखिम में डालने जैसा है। बरसात के मौसम में तो यह रास्ता पूरी तरह दलदल और फिसलन भरा हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मरीजों को उठानी पड़ती है। आपात स्थिति में एंबुलेंस भी इस रास्ते से नहीं पहुंच पाती।
स्थानीय समस्याएं एक नजर में
▪ 2 किमी के लिए 7 किमी घूमकर जाना पड़ रहा
▪ 60 साल से अधिक पुराना जर्जर पुल
▪ उखड़ा हुआ खड़ंजा और टूटा संपर्क मार्ग
▪ व्यापार और खेती पर सीधा असर
▪ समय, ईंधन और धन की बर्बादी
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि पुल की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर नए पुल का निर्माण कराया जाए। साथ ही संपर्क मार्ग पर पक्की सड़क बनवाकर क्षेत्र के लोगों को राहत दी जाए।
लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।