Azamgarh News : भदुली–बेलवाई सड़क के लिए 8वीं बार आमरण अनशन, समाजसेवी अरुण कुमार को पूर्व सैनिक पिता का मिला मजबूत समर्थन

Azamgarh News : आजमगढ़ में भदुली से बेलवाई मार्ग की जर्जर हालत के विरोध में समाजसेवी अरुण कुमार और कुलदीप कौर 8वीं बार आमरण अनशन पर बैठे। पूर्व सैनिक पिता ने दिया समर्थन। पढ़ें पूरी खबर।

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Azamgarh News : आजमगढ़।
जनपद के भदुली से बेलवाई तक जर्जर हो चुके मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर समाजसेवी अरुण कुमार और कुलदीप कौर एक बार फिर एक दिवसीय आमरण अनशन पर बैठ गए। यह इस मुद्दे को लेकर उनका आठवां आंदोलन है, लेकिन इसके बावजूद अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। अनशन स्थल पर लोगों की भीड़ जुटती रही और स्थानीय नागरिकों ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

यह मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है, जिससे प्रतिदिन हजारों लोग आवागमन करते हैं। स्कूली बच्चे, किसान, व्यापारी, मरीज और नौकरीपेशा लोग इसी सड़क से होकर गुजरते हैं। लेकिन वर्षों से सड़क की हालत बद से बदतर होती चली गई है। जगह-जगह गड्ढे, टूटी हुई सड़क, बारिश के मौसम में जलभराव और धूल-मिट्टी के कारण लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

आठवीं बार आंदोलन की मजबूरी

समाजसेवी अरुण कुमार ने बताया कि उन्होंने पहली बार इस सड़क की मरम्मत की मांग को लेकर कई वर्ष पहले प्रशासन को ज्ञापन दिया था। इसके बाद कई बार अधिकारियों से मुलाकात हुई, आश्वासन भी मिले, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्य शुरू नहीं हुआ। मजबूर होकर उन्होंने और उनकी सहयोगी कुलदीप कौर ने आंदोलन का रास्ता चुना।

उन्होंने कहा, “यह हमारा आठवां अनशन है। हर बार कहा जाता है कि जल्द काम शुरू होगा, लेकिन कुछ महीनों बाद स्थिति फिर वही हो जाती है। लोग रोज परेशान होते हैं, दुर्घटनाएं होती हैं, एंबुलेंस और स्कूल बसें तक फंस जाती हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे हुए हैं।”

पिता का भावुक समर्थन

इस बार आंदोलन की खास बात यह रही कि अरुण कुमार के पिता स्वयं अनशन स्थल पर मौजूद रहे और अपने बेटे को समर्थन दिया। पूर्व सैनिक रह चुके पिता ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक देश की सेवा की है और अब उनका बेटा समाज की सेवा कर रहा है।

उन्होंने कहा, “मैंने सेना में रहकर देश की सुरक्षा की, अब मेरा बेटा जनता के हक के लिए लड़ रहा है। यह सड़क अगर ठीक नहीं होती तो यहां के लोगों का जीवन और भी कठिन हो जाएगा। मैं अपने बेटे के साथ हूं और अंत तक उसका साथ दूंगा।”

उनकी मौजूदगी ने आंदोलन को और भावनात्मक बना दिया। कई स्थानीय लोग उनकी बातें सुनकर भावुक हो गए और आंदोलनकारियों के प्रति समर्थन जताया।

महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी

इस आंदोलन में कुलदीप कौर की भूमिका भी अहम है। उन्होंने कहा कि खराब सड़क का सबसे ज्यादा असर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। गर्भवती महिलाओं और मरीजों को अस्पताल ले जाने में कई बार घंटों लग जाते हैं।

कुलदीप कौर ने कहा, “हम किसी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं, बल्कि आम जनता की सुविधा के लिए लड़ रहे हैं। यह सड़क बनेगी तो पूरे क्षेत्र का विकास होगा। व्यापार बढ़ेगा, बच्चों की पढ़ाई आसान होगी और लोगों का समय बचेगा।”

स्थानीय लोगों की परेशानी

अनशन स्थल पर पहुंचे स्थानीय निवासियों ने भी अपनी पीड़ा साझा की। एक दुकानदार ने बताया कि सड़क खराब होने के कारण ग्राहक कम आते हैं। किसान ने कहा कि फसल मंडी तक ले जाने में वाहन खराब हो जाते हैं और किराया भी ज्यादा देना पड़ता है।

एक ग्रामीण महिला ने बताया, “बारिश में तो हालत और खराब हो जाती है। बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। कई बार लोग गिरकर घायल हो चुके हैं।”

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

लगातार आंदोलनों के बावजूद सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस समयसीमा तय नहीं की गई है। समाजसेवियों का आरोप है कि फाइलें दफ्तरों में घूमती रहती हैं, लेकिन काम शुरू नहीं होता।

अरुण कुमार ने चेतावनी दी कि यदि इस बार भी प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। जरूरत पड़ी तो जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और उच्च अधिकारियों तक आवाज पहुंचाई जाएगी।

उन्होंने कहा, “हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम कमजोर हैं। जनता हमारे साथ है और हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।”

जनहित का सवाल

भदुली–बेलवाई मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि कई गांवों की आर्थिक और सामाजिक जरूरतों से जुड़ा मुद्दा है। अच्छी सड़क होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार सभी क्षेत्रों को फायदा होगा।

स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो लोगों का आक्रोश बढ़ सकता है। उन्होंने मांग की कि जल्द से जल्द सड़क का सर्वे कराकर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए और इसकी नियमित निगरानी की जाए।

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