काँटा-काँटे से निकाला जाता है, फूल से नहीं – लेखक रामकेश एम. यादव

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आजमगढ़, गाँव तेजपुर,ब्लॉक व तहसील मार्टिनगंज के मूल निवासी रॉयल्टी प्राप्त कवि, गीतकार व वरिष्ठ लेखक रामकेश एम. यादव मुंबई ने अपने गृह जनपद आज़मगढ़ के एक प्रेस वार्ता में पहलगाम की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि भारत सरकार आतंकवादिओं के खिलाफ जो सख्त कदम उठाई और आगे उठायेगी, बिलकुल वाजिब है क्योंकि काँटा-काँटे से निकलता है, फूल से नहीं। चार बार मुँह की खाने के बावजूद भी पाकिस्तान सुधरकर हमारा एक अच्छा पड़ोसी नहीं बन सका, तकलीफ की बात है। जब तक उसका निजी नुकसान नहीं होगा, तबतक कुछ सुधरने की उम्मीद करना सही भी नहीं। भीख का कटोरा लेकर देश-देश घूँमनेवाले पाकिस्तान की माली हालत बेहद ख़राब है वहीं पूरी दुनिया हमारे देश को सर-आँखों पर रखती है।

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गौरतलब है कि रामकेश  बृहन्मुम्बई महानगरपालिका में एक शिक्षक पद से सेवानिवृत्त होकर अपना सारा समय साहित्य लेखन में व्यतीत कर रहे हैं। अब तक इन्हें 421 पुरस्कारों व सम्मानपत्रों से नवाजा जा चुका है। 26 पुस्तकें लिख चुके श्री यादव का 1700 से अधिक लेख आदि देश के विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुका है। महाराष्ट्र राज्य पाठ्य पुस्तक निर्मिती विभाग व अभ्यासक्रम संशोधन मण्डल पुणे द्वारा इनकी 2 रचनाएँ पाठ्यक्रम में शामिल की जा चुकी हैं। इनका साहित्य-लेखन अनवरत जारी है।

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यादव सामाजिक सरोकारों से जुड़कर आज भी समाज को एक नया आयाम दे रहे हैं। इन्हें हाल में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक स्मृति सम्मान 2025- निस्वार्थी राष्ट्रीय समूह ढाणा झज्जर हरियाणा, संस्थापक:अशोक कुमार जाखड़, सह-संस्थापिका: अपराजित शर्मा,अध्यक्षा: रश्मि पाण्डेय शुभि जी ने सम्मानित किया है।

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