Ward News: रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका 500% तक टैरिफ की धमकी दे चुका है। भारत अब वेनेजुएला और मिडिल ईस्ट से सस्ते तेल के विकल्प तलाश रहा है। सवाल ये है – क्या आम आदमी को मिलेगा सस्ता पेट्रोल या महंगी होगी भू-राजनीति?
अमेरिकी प्रशासन ने भारत को रूसी तेल खरीद जारी रखने पर भारी-भरकम टैरिफ की चेतावनी दी है। राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थन वाले प्रस्ताव के तहत 500 % तक टैरिफ लगाने की शक्ति पर विचार चल रहा है, जिससे भारत के निर्यात को गहरा झटका लग सकता है।
🔹 ट्रंप टीम का कहना है कि रूसी तेल खरीदने वाले देशों को भारी टैक्स या प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
🔹 अमेरिकी वित्त सचिव ने यह भी दावा किया है कि भारत ने पहले के 25 % टैरिफ के बाद रूसी तेल खरीद घटा दी है।
🛢️ भारत की तेल रणनीति: रूस से कम, मध्य-पूर्व और वैकल्पिक स्रोतों की तरफ़
भारत ने रूसी तेल आयात को कम कर दिया है और मिडिल ईस्ट के देशों तक निर्भरता बढ़ाई है, ताकि अमेरिका-यूएस प्रतिबंधों और टैरिफ दबाव से निपटा जा सके।
🔸 रिफाइनर कंपनियाँ रूस से तेल पर निर्भरता घटा रही हैं और मध्य-पूर्व के तेल की खरीद बढ़ा रही हैं।
🔸 रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने रूस से सज़ा-अनुपालन तेल खरीद को एक महीना के लिए फिर शुरू किया है, लेकिन सामान्य स्तर पर रूस से खरीद कम रहने की उम्मीद है।
🇻🇪 वेनेज़ुएला से तेल? विकल्प तो है, पर सप्लाई मुद्दे भारी
भारत के कुछ बड़े रिफाइनर जैसे MRPL और IOCL वेनेज़ुएला के तेल विकल्प पर विचार कर रहे हैं — खासकर जब वे रूस के आयात को घटा रहे हैं।
✅ MRPL ने रूसी आयात रोक दिया और वेनेज़ुएला के तेल पर विकल्प तलाश रहा है।
✅ IOCL के चेयरमैन ने कहा है कि भारतीय रिफ़ाइनरी वेनेज़ुएला का क्रूड संसाधित करने के लिए तैयार हैं, अगर सप्लाई उपलब्ध हुआ।
⚠️ लेकिन अमेरिका का नियम यह है कि वेनेज़ुएला से तेल खरीदने पर भी उनके टैरिफ लागू हो सकते हैं, इसलिए भारत के लिए फैसला आसान नहीं।
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🤝 भारत-अमेरिका ट्रेड क्राइसिस: दोस्ती पर आर्थिक तनाव
भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद ने कूटनीतिक रिश्तों को तनाव में डाल दिया है।
🔹 अमेरिका ने भारतीय सामान पर पहले ही 50 % तक टैरिफ लगाया है।
🔹 भारत इस टैरिफ को “अनुचित और आर्थिक दबाव” बता चुका है और व्यापार नीति में अपनी रणनीति बदल रहा है।
📊 क्या भारत सस्ता तेल ले पाएगा? फैसला अब भू-राजनीति तय करेगी
✔️ रूसी तेल पहले सस्ता था लेकिन अब टैरिफ जोखिम बढ़ रहा है।
✔️ वेनेज़ुएला एक वैकल्पिक स्रोत है, पर सप्लाई और अमेरिकी टैरिफ की दिक्कतें हैं।
✔️ मध्य-पूर्व से तेल खरीद भारत को टैरिफ दबाव से कुछ राहत दे सकता है।
निष्कर्ष: भारत की ऊर्जा नीति अब सिर्फ बाज़ार की नहीं — वैश्विक राजनीति और व्यापार दबाव की नेविगेशन पर टिका है।
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