चलने से पहले ही खंडहर बना लाखों-करोड़ों का ‘आरोग्य मंदिर’, मौत के साये में इलाज की तैयार: आजमगढ़ के उदियावा गांव में लाखों-करोड़ों की लागत से बना आयुष्मान आरोग्य मंदिर उद्घाटन से पहले ही जर्जर हो गया। ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट लाइन से हादसे का खतरा।
बरदह (आजमगढ़)।
सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत और भ्रष्टाचार की पोल खोलता एक चौंकाने वाला मामला उदियावा गांव से सामने आया है। जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से बनाया जा रहा आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उप-स्वास्थ्य केंद्र) उद्घाटन से पहले ही जर्जर हालत में पहुंच चुका है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रहा यह भवन अब अस्पताल से ज्यादा खंडहर नजर आ रहा है।
घटिया निर्माण, उखड़ता प्लास्टर और दीवारों पर काई
निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन भवन की दीवारों पर काई जम चुकी है, प्लास्टर उखड़ रहा है और जगह-जगह दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। इससे निर्माण की गुणवत्ता और ठेकेदार-विभागीय मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लोकार्पण से पहले ही मरम्मत की नौबत आ जाना, खुले भ्रष्टाचार का प्रमाण है।
सिर के ऊपर झूल रही 11 हजार वोल्ट की मौत
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल भवन के ठीक ऊपर से 11,000 वोल्ट की हाई-टेंशन लाइन गुजर रही है। ऐसे में मरीज, डॉक्टर, नर्स और कर्मचारी हर पल मौत के साये में रहेंगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज हवा या तकनीकी खराबी की स्थिति में कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा है।
बाढ़ क्षेत्र में अस्पताल ! चयन पर सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि जहां यह भवन बनाया जा रहा है, वह इलाका हर साल बाढ़ के पानी में डूब जाता है। बरसात में चारों तरफ जलभराव हो जाता है, जिससे नींव कमजोर हो रही है। सवाल यह है कि—
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बाढ़ प्रभावित जमीन का चयन किस आधार पर हुआ?
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हाई-टेंशन लाइन के नीचे निर्माण की अनुमति किसने दी?
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क्या कागजों में ही सुरक्षा मानकों का पालन कर लिया गया?
उम्मीदों पर पानी, आक्रोश में ग्रामीण
उदियावा के ग्रामीण वर्षों से एक अच्छे अस्पताल की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन अब उन्हें सुविधा के बजाय खतरे का ढांचा मिल रहा है। लोगों में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों की मांग है कि—
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पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो
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दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए
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अस्पताल को सुरक्षित स्थान पर दोबारा बनाया जाए या भवन को तकनीकी रूप से सुरक्षित किया जाए
बड़ा सवाल
क्या सरकारी धन सिर्फ दीवारों में काई उगाने और लोगों की जान जोखिम में डालने के लिए खर्च किया जा रहा है?
अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह ‘आरोग्य मंदिर’ इलाज का नहीं, बल्कि दुर्घटना का केंद्र बन सकता है।
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