आजमगढ़ विकास प्राधिकरण में नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियाँ ! सील इमारतों में फिर निर्माण, शासन तक पहुंचा मामला:आजमगढ़ विकास प्राधिकरण (ADA) में अवैध निर्माण का खेल अब बेखौफ और बेशर्म तरीके से चल रहा है। नियम-कानून को ताक पर रखकर सील की गई इमारतों में दोबारा निर्माण कराया जा रहा है, और हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी या तो नदारद हैं या मौन साधे हुए हैं।
आजमगढ़ विकास प्राधिकरण (ADA) में अवैध निर्माण का खेल अब बेखौफ और बेशर्म तरीके से चल रहा है। नियम-कानून को ताक पर रखकर सील की गई इमारतों में दोबारा निर्माण कराया जा रहा है, और हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारी या तो नदारद हैं या मौन साधे हुए हैं।
राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (उ.प्र. पूर्वी) के प्रदेश संयोजक शिवमोहन शिल्पकार ने इस गंभीर मामले को सीधे आवास विभाग के प्रमुख सचिव तक पहुंचाकर प्रशासनिक तंत्र पर करारा सवाल खड़ा कर दिया है। उनके द्वारा भेजे गए पत्र में साफ लिखा है कि आजमगढ़ विकास प्राधिकरण में स्थायी सचिव, ए.ई. और अन्य विभागीय अधिकारियों की तैनाती न होने का फायदा उठाकर भू-माफिया और प्रभावशाली लोग मनमानी कर रहे हैं।
पत्र में आरोप है कि जिन भवनों को नियम उल्लंघन पर सील किया गया था, उन्हीं अर्धनिर्मित ढांचों में रातों-रात निर्माण कार्य कराया जा रहा है। न नक्शा पास, न मानक पूरे—बस रसूख और साठगांठ के दम पर अवैध निर्माण को संरक्षण दिया जा रहा है। सवाल यह है कि सील तोड़ी कैसे गई? किसके आदेश पर मजदूर और सामग्री अंदर पहुंची? और सबसे अहम—किसकी शह पर यह सब हो रहा है ? यह भी आरोप लगाया गया है कि नियमों को दरकिनार कर फाइलें दबाई जा रही हैं, निरीक्षण केवल कागजों में हो रहा है और कार्रवाई के नाम पर खामोशी ओढ़ ली गई है। इससे न सिर्फ शहरी नियोजन ध्वस्त हो रहा है, बल्कि सरकारी जमीन, सड़क और सार्वजनिक सुविधाओं पर भी अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है । शिवमोहन शिल्पकार ने मांग की है कि आजमगढ़ विकास प्राधिकरण में तत्काल स्थायी सचिव व ई.डी. की नियुक्ति की जाए और अवैध निर्माण व दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो यह साफ संकेत होगा कि कानून कुछ खास लोगों के लिए ही है ? । इस सनसनीखेज मामले की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश और आजमगढ़ मंडलायुक्त को भी भेजी गई है। अब देखना यह है कि शासन सख्ती दिखाता है या फिर अवैध निर्माण का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।
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