ईरान में विरोध प्रदर्शन जारी खामेनेई की नीतीयां बनी हैं कारण: ईरान में जारी भीषण विरोध प्रदर्शन अब एक नए मोड़ पर पहुँच चुके हैं। सोशल मीडिया पर ईरान का झंडा बदले जाने से राजनीतिक भूचाल आ गया है। क्या यह सिर्फ एक डिजिटल बदलाव है या सत्ता के खिलाफ बड़े संकेत? पूरी जानकारी इस रिपोर्ट में देखें ।
ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं और यह एक गंभीर राजनीतिक एवं सामाजिक संकट में बदलता जा रहा है। विरोध प्रदर्शन की वजह सिर्फ महंगाई या आर्थिक मंदी ही नहीं रह गई है, बल्कि अब यह सत्ता परिवर्तन और शासन के खिलाफ व्यापक असंतोष का रूप ले चुका है। देश के भीतर और बाहर दोनों जगह इस आंदोलन को लेकर सियासी बहस गरमाई हुई है। इस बीच सोशल मीडिया पर ईरान के राष्ट्रीय झंडे को बदल दिए जाने का एक विवाद भी सामने आया है जिसने पूरी अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींच लिया है।
प्रदर्शन का कारण: आर्थिक संकट से राजनीतिक असंतोष तक
ईरान में विरोध प्रदर्शन अपनी सबसे व्यापक और सबसे हिंसक लहर के बीच हैं। शुरुआत में यह प्रदर्शन महंगाई, आर्थिक असंतुलन और मुद्रा के अवमूल्यन के खिलाफ थे, जब तेहरान के ग्रैंड बाज़ार के व्यापारियों ने 28 दिसंबर 2025 को सड़कों पर उतरकर विरोध करना शुरू किया। धीरे-धीरे यह देश के 31 प्रांतों और बड़े शहरों तक फैल गया, जिसमें हजारों लोग शामिल हैं और उन्होंने सरकार और इस्लामी शासन व्यवस्था के खिलाफ सत्तांतरण की मांगें भी जोरदार ढंग से उठाई हैं । प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार आर्थिक तबाही के लिए जिम्मेदार है, जिसमें रियाल की गिरती कीमत और बेरोज़गारी प्रमुख हैं। इसके साथ ही यह आंदोलन अब राजनीतिक आज़ादी और नागरिक अधिकारों की व्यापक मांग में बदल चुका है।
हिंसा और प्रतिक्रियाएँ: सरकार का कड़ा रुख़
विरोध प्रदर्शन अब सरकारी सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच प्रत्यक्ष टकराव का रूप ले चुके हैं। कई रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़पें, आगजनी, और व्यापक विद्रोह की घटनाएँ हुई हैं। सरकारी भवनों और वाहनों को निशाना बनाया गया है और राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में इंटरनेट और फोन सेवाएँ काट दी गईं ताकि सूचना संचार को प्रतिबंधित किया जा सके । इसी बीच ही, स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने रिपोर्ट किया है कि प्रदर्शनकारियों पर बेतहाशा बल प्रयोग हुआ है, जिसके कारण दर्जनों लोग मारे गए तथा हज़ारों प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए हैं । सरकार ने प्रदर्शनकारियों को विदेशी समर्थन से जोड़कर आरोप लगाया है और टेलीविजन पर इसे “विदेशी साजिश” के रूप में पेश किया है, जबकि विरोधी नेता और कुछ अंतरराष्ट्रीय हस्तियाँ ईरानी जनता के मूलभूत अधिकारों की बात कर रहे हैं।
ईरानी झंडे को लेकर सोशल मीडिया विवाद
सबसे हालिया और ध्यान खींचने वाला मामला यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) ने ईरान का झंडा दिखाने के तरीके में अचानक बदलाव किया है। परंपरागत इस्लामी गणराज्य के आधिकारिक झंडे के स्थान पर अब “शेर और सूर्य” वाला ऐतिहासिक प्रतीक दिखाया जा रहा है, जो 1979 की क्रांति से पहले के ईरानी झंडे का प्रतीक था। इस प्रतीक का इस्तेमाल अक्सर राजतांत्रिक या विरोधी प्रतीकात्मक रूप में देखा जाता रहा है।
यह डिजिटल बदलाव मुख्य रूप से एक उपयोगकर्ता की माँग पर लागू किया गया, और इसके बाद X पर ईरान से जुड़ी कुछ आधिकारिक प्रोफाइल पर भी यह झंडा दिखने लगा। यह बदलाव सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर त्वरित रूप से वायरल हुआ और राजनीतिक संकेत माना जाने लगा—कि डिजिटल समुदाय असंतोष के पक्ष में एक प्रतीकात्मक कदम उठा रहा है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
प्रदर्शन की दिशा और भविष्य
विरोध प्रदर्शन अब पुराने शासन ढांचे के खिलाफ गहरी आलोचना में बदल गया है। कुछ प्रदर्शनकारी पूर्व के शाहतात (शाही परिवार) के पक्ष में नारे भी लगा चुके हैं, जबकि कई युवा और नागरिक सीधे इस्लामी शासन व्यवस्था के परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। रज़ा पहलवी जैसे निर्वासित नेता भी सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों से समर्थन कर रहे हैं, जो ईरान के भविष्य को राजनीतिक रूप से अनिश्चित बना रहे हैं । ईरानी सरकार ने आधिकारिक तौर पर धैर्य और शांति के साथ समस्याओं का समाधान करने की बात कही है, परंतु सड़कों पर चल रही उग्र परिस्थितियाँ यह संकेत देती हैं कि संकट अभी भी गहराता जा रहा है।
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