आज़मगढ़ ज़मीन विवाद में जबरन टॉवर निर्माण का आरोप: ज़मीन विवाद में जबरन टॉवर निर्माण का आरोप, प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
आज़मगढ़। जनपद के जहानागंज थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बरहटीर जगदीशपुर में भूमि विवाद एक बार फिर गंभीर होता दिखाई दे रहा है। प्रार्थिनी निर्मला राय पत्नी कमलेश राय ने आरोप लगाया है कि सहखातेदार गाटा संख्या-72 की जमीन पर बिना अंतिम न्यायिक निर्णय के जबरन मोबाइल टॉवर लगाया जा रहा है।
प्रार्थिनी के अनुसार उन्होंने 16 अगस्त 2022 को सहखातेदारी की जमीन की रजिस्ट्री कराई थी, जिसके बाद से ही भूमि को लेकर विवाद चला आ रहा है। मामले में विपक्षी पक्ष द्वारा कथित रूप से फर्जी तरीके से खतौनी में नाम दर्ज कराकर जमीन पर दावा किया गया। इस विवाद को लेकर जिलाधिकारी से लेकर मंडलायुक्त तक प्रार्थना पत्र दिए गए, जिसके बाद मंडलायुक्त द्वारा समाधान दिवस पर निष्पक्ष जांच के निर्देश भी दिए गए थे । आरोप है कि जांच व न्यायिक प्रक्रिया लंबित होने के बावजूद विपक्षी पक्ष ने पुलिस और राजस्व विभाग से मिलीभगत कर प्रार्थिनी की जमीन को भी अपनी भूमि में शामिल कर बाउंड्री कर ली। इतना ही नहीं, 5 मार्च 2025 को विपक्षी के पिता द्वारा दीवानी न्यायालय में वाद दायर किए जाने के बाद भी स्थिति यथावत बनी रही।
विवादित जमीन पर टॉवर !
प्रार्थिनी का कहना है कि विपक्षी पक्ष ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर टावर कंपनी से अनुबंध कर लिया और जमीन को निर्विवाद बताकर मोबाइल टॉवर लगाने का कार्य शुरू कर दिया। जब इसकी जानकारी हुई तो प्रार्थिनी ने 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी, पुलिस ने आकर कार्य रुकवाया । वहीं, उप-जिलाधिकारी न्यायालय में धारा 116 उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के अंतर्गत वाद भी विचाराधीन है, जिसमें जमीन के स्वामित्व को लेकर कई पक्षकार शामिल हैं। न्यायालयी दस्तावेज़ों से स्पष्ट है कि भूमि के बंटवारे और अधिकार को लेकर मामला अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है । प्रार्थिनी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आज़मगढ़ से मांग की है कि जब तक न्यायालय से अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण अथवा मोबाइल टॉवर लगाने का कार्य तत्काल रोका जाए, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो।
अब देखना यह है कि प्रशासन और पुलिस इस गंभीर भूमि विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक यथास्थिति बनाए रखी जाती है या नहीं। यह भी पढ़ें …..
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